दर्शन दो घनश्याम नाथ मोरी अखियां प्यासी रे लिरिक्स

।। दोहा ।।
ब्रज की रज भक्ति बनी, ब्रज है कान्हा रूप।
कण-कण में माधव बसे, कृष्ण समान स्वरूप।

दर्शन दो घनश्याम नाथ ,
मोरी अँखियाँ प्यासी रे।

मंदिर मंदिर मूरत तेरी ,
फिर भी न दीखे सूरत तेरी।
युग बीते ना आई मिलन की ,
पूरणमासी रे।
दर्शन दो घनश्याम नाथ ,
मोरी अँखियाँ प्यासी रे।

द्वार दया का जब तू खोले ,
पंचम सुर में गूंगा बोले।
अंधा देखे लंगड़ा चल कर ,
पँहुचे काशी रे।
दर्शन दो घनश्याम नाथ ,
मोरी अँखियाँ प्यासी रे।

पानी पी कर प्यास बुझाऊँ ,
नैनन को कैसे समजाऊँ।
आँख मिचौली छोड़ो अब तो ,
घट घट वासी रे।
दर्शन दो घनश्याम नाथ ,
मोरी अँखियाँ प्यासी रे।

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दर्शन दो घनश्याम नाथ मोरी अखियां प्यासी रे darshan do ghanshyam shri krishna bhajan lyrics in hindi
हिंदी भजन लिरिक्स इन हिंदी
कृष्ण भजन संग्रह लिरिक्स
भजन :- दर्शन दो घनश्याम नाथ
गायिका :- ह्लादिनी युवराज भोसले

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