दारुडिया ने अलगो बालो रे भजन लिरिक्स

।। दोहा ।।
राम राज में दूध मिलिया, कृष्ण राज में घी।
कलयुग में दारु मिलियो, सोच समझ ने पी।

दारुढिया ने अलगो बालो रे,
भुंडी आवे वास।
भुंडी आवे वास ,
ने तन रो कीनो नास।
दारुढिया ने अलगो बालो रे ,
भुंडी आवे वास।

सगाँ संबंधी आवे ,
वे बैठा – बैठा भाले।
बैठा – बैठा भाले ,
वे सुथा – सुथा भाले।
दारुढिया ने अलगो बालो रे,
भुंडी आवे वास।
दारुढिया …..

काम काज तो करे न कोई ,
सिदो ठेका पे जावे।
वेगो उठे ने खेता में जावे ,
राम बिगाड़ा बोले रे।
दारुढिया ने अलगो बालो रे,
भुंडी आवे वास।
दारुढिया …..

पाँव भरियो पीनो ,
पचे मल मूत में पड़ियो।
थोड़ो पीदो ने गणो रे चडीयो ,
कादा कीचड़ में पड़ियो रे।
दारुढिया ने अलगो बालो रे,
भुंडी आवे वास।
दारुढिया …..

घर में तो खाबा ने कोनी ,
रेवे मिनका री उधार।
टाबरिया तो भूखा मरे ,
पछे भीख माँगन ने जाय।
दारुढिया ने अलगो बालो रे,
भुंडी आवे वास।
दारुढिया …..

संत महात्मा केवे ,
दारू में दोष बतावे ।
खबर पड़ी तो मती पीवो ,
थारो जनम सफल हो जाय।
दारुढिया ने अलगो बालो रे,
भुंडी आवे वास।

दारुढिया ने अलगो बालो रे,
भुंडी आवे वास।
भुंडी आवे वास ,
ने तन रो कीनो नास।
दारुढिया ने अलगो बालो रे ,
भुंडी आवे वास।

प्रकाश माली के भजन | prakash mali bhajan video

दारुडिया ने अलगो बालो रे Darudiya Ne Algo Balo राजस्थानी लोक भजन लिरिक्स
भजन :- दारुढिया ने अलगो बालो
गायक :- प्रकाश माली

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