मुकुट सिर मोर का मेरे चित चोर का भजन लिरिक्स

।। दोहा ।।
ब्रज की रज चंदन बनी, माटी बनी अबीर,
कृष्ण प्रेम रंग घोल के, लिपटे सब ब्रज वीर।

मुकुट सिर मोर का,
मेरे चित चोर का ।
दो नैना घनश्याम के,
कटीले हैं कटार से।

आजा में भर लू तुझे ,
अपनी ही बाहो में।
आजा छिपालु तुझे ,
अपनी निगाहो में।
दीवानो ने विचार के ,
कहा ये पुकार के।
दो नैना सरकार के,
कटीले हैं कटार से।

रास बिहारी नहीं ,
तुलना तुम्हारी।
तुमसा ना देखा कोई ,
पहले अगाडी ।
दीवानों ने विचार के,
कहा यह पुकार के।
दो नैना सरकार के,
कटीले हैं कटार से।

प्रेम लजाये तेरी ,
बाकी अदाओ पर।
फूल गटाये तेरी ,
तिरछी निगाहो पर।
जमाने को विसार के ,
दीवाने गये हार के।
दो नैना सरकार के,
कटीले हैं कटार से।

मुकुट सिर मोर का,
मेरे चित चोर का ।
दो नैना घनश्याम के,
कटीले हैं कटार से।

prem mehra ke bhajan video

मुकुट सिर मोर का मेरे चित चोर का भजन mukut sir mor ka krishna hindi bhajan lyrics
राधा कृष्ण भजन लिरिक्स इन हिंदी
भजन :- मुकुट सिर मोर का
गायक :- प्रेम मेहरा

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