तेरा जनम मरण मिट जाए, तू हरी का नाम सुमिर प्यारे ।

तेरा जनम मरण मिट जाए, तू हरी का नाम सुमिर प्यारे । बालापन में मन खेलन में, सुख दुःख नहीं था रे, जोबन रसिया कामन बसिया तन मन धन हारे । तू हरी का नाम सुमिर प्यारे… बूढा हो कर घर में सो कर, सुने वचन खारे, दुर्बल काया रोग सताया, तृष्णा तन जारे । …

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नहीं चलाओ बाण व्यंग के ऐह विभीषण ताना ना सेह पाऊं, क्यों तोड़ी है यह माला,

नहीं चलाओ बाण व्यंग के ऐह विभीषण ताना ना सेह पाऊं, क्यों तोड़ी  है यह माला, तुझे  ए  लंकापति बतलाऊं मुझ में भी है तुझ में भी है, सब में है समझाऊं ऐ लंका पति विभीषण ले देख मैं तुझ को आज दिखाऊं – जय श्री राम – श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने …

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मन मैला और तन को धोए, फूल को चाहे,कांटे बोये…कांटे बोये ।

मन मैला और तन को धोए, फूल को चाहे,कांटे बोये…कांटे बोये । मन मैला और तन को धोए… करे दिखावा भगति का क्यों उजली ओढ़े चादरिया । भीतर से मन साफ किया ना, बाहर मांजे गागरिया । परमेश्वर नित द्वार पे आया, तू भोला रहा सोए ॥ मन मैला और तन को धोए… कभी ना …

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पूरे करदे तू मेरे वी सवाल नी माए ॥

दर ते अवांगे तेरे सालो साल नी माए । पूरे करदे तू मेरे वी सवाल नी माए ॥ सुहा चोला ते चुन्नी तिल्लेदार नी माए । मैं चढ़ावांगी तेरे दरबार नी माए ॥ दर ते अवांगे तेरे… आवां चढ़ के चढ़ाईया नंगे पैर नी माए । पादे चोली च सगना दी खैर नी माए ॥ …

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दर दिवार दर्पण भयो, जित देखू तित तोय ।

दर दिवार दर्पण भयो, जित देखू तित तोय । कंकर पत्थर ठीकरी, सब भयो आरसी मोय ॥ आवे ना जावे, मरे नहीं जन्मे, सोई निज पीव हमारा हो । ना प्रथम जननी ने जनमो, ना कोई सिर जन हारा हो ॥ आवे ना जावे, मरे नहीं जन्मे सोई निज पीव हमारा हो… साधनसिद्ध मुनि ना …

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इक दिन काहना शोर मचाये, पेट पकड़ चिलाये

इक दिन काहना शोर मचाये, पेट पकड़ चिलाये अरे क्या हो गया है, अरे क्या हो गया है भामा रुक्मण समझ ना पाये, अरे क्या हो गया है, अरे क्या हो गया है पूछे हैं दोनों रानी, पीड़ा मिटेगी कैसे सांवरे मैं लाऊँ भर के पानी बोले मैं ना बचूं मैं तो आज रे चरणो …

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मुझे रास आ गया है, तेरे दर पे सर झुकाना । तुझे मिल गया पुजारी, मुझे मिल गया ठिकाना ॥

मुझे रास आ गया है, तेरे दर पे सर झुकाना । तुझे मिल गया पुजारी, मुझे मिल गया ठिकाना ॥ मुझे कौन जानता था तेरी बंदगी से पहले । तेरी याद ने बना दी मेरी ज़िन्दगी फ़साना ॥ मुझे इसका गम नहीं है की बदल गया ज़माना । मेरी ज़िन्दगी के मालिक कहीं तुम बदल …

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विच्च पहाड़ां गुफा दे अन्दर, मन्दिर एक निराला ए

विच्च पहाड़ां गुफा दे अन्दर, मन्दिर एक निराला ए बारो महीने खुलेया रेह्न्दा, ना बुहा ना ताला ए जय माता दी केहन्दे केहन्दे चढ़दे लोग चढाईआं ने इक पासे ने ऊँचे पर्वत दूजे पासे खाईयां ने फिर वी जो दर्शन नु आउँदा, समझो किस्मत वाला ए बारो महीने खुलेया रेह्न्दा… औंदी जांदी संगता दा जित्थे …

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