एक डाल दो पंछी बैठा कौन गुरु कौन चेला भजन

एक डाल दो पंछी बैठा ,
कौन गुरु कौन चेला। २।

गुरु की करणी गुरु करेगा।
चेला की करणी चेला रे साधु भाई।
उड़ जा हंस अकेला।
एक डाल। …..

माटी चुण चुण महेल बनाया ,
लोग कह घर मेरा।
ना घर तेरा ना घर मेरा ,
चिड़िया रैन बसेरा रे साधु भाई।
उड़ जा हंस अकेला।
एक डाल। …..

मात कहे ये पुत्र हमारा ,
बहन कहे ये वीरा।
भाई कहे भुजा हमारी ,
नारी कहे नर मेरा रे साधु भाई।
उड़ जा हंस अकेला।
एक डाल। …..

पेट पकड़ कर माता रोये ,
बाहे पकड़ कर भाई।
लपट जपट के त्रिया रोये ,
हंस अकेला जाये रे साधु भाई।
उड़ जा हंस अकेला।
एक डाल। …..

कोड़ी कोड़ी माया जोड़ी ,
जोड़ भरेला थेला।
कहेत कबीरा सुण भाई साधु ,
संग चले ना गेला रे साधु भाई।
उड़ जा हंस अकेला।
एक डाल। …..

एक डाल दो पंछी बैठा ,
कौन गुरु कौन चेला। २।

एक डाल दो पंछी बैठा कौन गुरु कौन चेला भजन ek daal do panchhi re baitha kaun guru kaun chela bhajan Hindi Lyrics

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