ओम जय गुरुदेव हरे आरती लिरिक्स | om jai gurudev hare aarti lyrics

जय गुरुदेव हरे ,
प्रभु जय गुरुदेव हरे ।
अधम उद्धारी करणे ,
संतन रूप धरे ,
ओम जय गुरुदेव हरे ॥

मरूधर माँहि प्रकटे ,
गांव शिकारपुरे ।
कलबी वंश उजागर ,
हरि सिंह घर जनम धरे ।
ओम जय गुरुदेव …

धेनु चरावे हरि गुण गावे ,
प्रेम सूं नृत्य करे ।
दर्शन दीना सुमिरण कीना ,
चरणां शीश धरे ॥
ओम जय गुरुदेव …

केशर कुंकुंम केरी छापां ,
सर माटी उबरे ।
देश – देश के आवे जातरू ,
परचा खूब पड़े ।
ओम जय गुरुदेव …

भादव मास शुक्ल एकादश ,
मेला पूर्ण भरे ।
जल बिच जहाज पथर की तारी ,
गुरु परताप तरे ।
ओम जय गुरुदेव …

अंधलों को मिले अखियाँ ,
दुष्टियों को कोढ़ झरे ।
बांझियों को पुत्र दीना ,
बिगड्या कारज सरे ॥
ओम जय गुरुदेव …

प्रेम भाव से जो कोई प्राणी ,
नित उठ पूजन करे ।
मन वांछित फल पावे ,
भव सागर को तरे ॥ .
ओम जय गुरुदेव …

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आरती :- ॐ जय गुरुदेव हरे
गायक :- मोइनुद्दीन मनचला

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