गुरुजी बिना कौन माने प्रेम जल पावे भजन लिरिक्स

।। दोहा ।।

तरवर सरवर संतजन , चौथा बरसे मेह ।
परमारथरे कारणे , ऐचारों धारी देह ।।

गुरांसा बिना ,
कौण प्रेमजळ पावे ।
कूपां रा नीर किण विध सूखे ,
सीर सायरियां सूं आवे ॥

कर्मा री जाजां दो प्रकारां ,
शुभ अशुभ कहावे ।
अशुभ करमने मार हटावे ,
रामनाम चित्त लावे ॥
गुरांसा बिना। …….

सतगुरु म्हारा चनण सरूपी ,
फूल वास ना लेवे ।
लिपट्योड़ा भुजंग मगन होई जावे ,
कदेई छोड़ नहीं जावे ।।
गुरांसा बिना। …….

सतगुरु म्हारा भंवर सरूपी ,
कीट पकड़ घर लावे ।
दे घरणाटो शब्द सुणावे ,
कर भंवरा ने उड़ावे ॥
गुरांसा बिना। …….

दूध में घिरत मेहन्दी में लाली ,
ज्ञान गुरासाऊँ आवे ।
कहत कबीर सुणो भाई साधो ,
भाग पुरबला पावे ।।
गुरांसा बिना। …….

गुरुजी बिना कौन माने प्रेम जल पावे. guru bina kon prem jal pave. satguru ke bhajan. prakash mali bhajan

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