गुरु समान नहीं दाता जग में भजन लिरिक्स

।। दोहा ।।
गुरु बिणजारा ज्ञान रा ,और लाया वस्तु अमोल।
सौदागर साँचा मिले , वे ले सिर साठे तोल।

सार सबद सतगुरु जी रा मानो ,
सुन में जाय समाता रे।
जुग माहि गुरु समान नहीं दाता।

वस्तु अमोलक दी मारा सतगुरु ,
भली सुनाई बाता।
काम क्रोध ने कैद कर राखो ,
मार लोभ ने लाता।
जुग माहि गुरु समान नहीं दाता। टेर।

काल करे सो आज करले ,
फिर दिन आवे नहीं हाथा।
चौरासी में जाय पड़ेला ,
भोगेला दिन राता।
जुग माहि गुरु समान नहीं दाता। टेर।

सबद पुकारि पुकारि केवे है ,
कर संतन का साथा।
सेवा वंदना कर सतगुरु री ,
काल नमावे माथा।
जुग माहि गुरु समान नहीं दाता। टेर।

कहत कबीर सुनो धार्मिदासा ,
मान वचन हम कहता।
परदा खोल मिलो सतगुरु से ,
चलो हमारे साथा।
जुग माहि गुरु समान नहीं दाता। टेर।

सार सबद सतगुरु जी रा मानो ,
सुन में जाय समाता रे।
जुग माहि गुरु समान नहीं दाता

suresh lohar bhajan video

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सतगुरु भजन लिरिक्स इन हिंदी
भजन :- जग माहि गुरु समान नहीं दाता
गायक :- सुरेश लोहार

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