जीवन की रुलाती घड़ियों में भजन लिरिक्स

जीवन की रुलाती घड़ियों में ,
मिलता है तुम्हारा प्यार मुझे ।
कुछ चाह न बाकी रहती है ,
प्रभु आके तेरे दरबार मुझे ।।

मेरे दिल के गगन पर आके कभी ,
जब गम की घटा छा जाती है ।
इक पल में कहीं से दया तेरी ,
तब बन के हवा आ जाती है ।
तुझे रक्षक सबका कहने में ,
फिर क्यों हो भला इन्कार मुझे ।
जीवन की रुलाती …

प्रभु दर पे तेरे आने वाला ,
झोली अपनी भर लेता है ।
तेरे दर से प्रभु मैं क्या माँगू ,
बिन माँगे तू सब कुछ देता है ।
जो तेरी इच्छा है दाता ,
हरदम है वही स्वीकार मुझे ॥
जीवन की रुलाती …

जब तक मैं प्रभु दुनिया में रहूँ ,
बस एक मेरा यह काम रहे ।
रहे प्यार तुम्हारी भक्ति में ,
चाहे जन्म मिले सौ बार मुझे ।
जीवन की रुलाती …

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भजन :- जीवन की रुलाती घड़ियों में
गायक :- मिथिलेश शास्त्री

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