ढोल बाजे रे माता जोगणियाँ भजन लिरिक्स

॥ दोहा ॥
घाटां वाळी मावड़ी , मोटी है दातार ।
तीन लोक रे माँयने , होवे जय जय कार ।

ढोल बाजे रे माता ,
जोगणियाँ रे धाम ।
जोगणियाँ रे धाम बाज ,
जगदम्बा रे धाम ।

ऊँचे आसन आप विराजे ,
शक्ति रोअवतार ।
ब्रह्मा विष्णु देव मनावे ,
ध्यान धरे त्रिपुरार ॥
ढोल बाजे। ….

शीश मुकुट री शोभा न्यारी ,
कंठा नवसर हार ।
रंग सुरंगी चूनर सोवे ,
हाथां में तलवार ॥
ढोल बाजे। ….

काळा गौरा भैरू जिण रे ,
नितरा चंवर ढुलावे ।
घाटां वाळी जगदम्बा रो ,
जोगणियाँ जस गावे ॥
ढोल बाजे। ….

साँचो है दरबार जगत में ,
नर नारी सब ध्यावे ।
जो कोई सिंवरे साँचे मन सूं ,
मनचाया फळ पावे ॥
ढोल बाजे। ….

मोटी है दातार भवानी ,
भर देवे भण्डार ।
तीन लोक में जोगणियाँ री ,
गूंजे जय – जयकार
ढोल बाजे। ….

जोगणियाँ मातारी महिमा ,
दास अशोक सुणावे ।
हिवड़ा में सन्तोष दिरावो ,
चरणां शीश नवावे ॥
ढोल बाजे। ….

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