शाम ढले जमुना किनारे भजन लिरिक्स

शाम ढले जमना ,
किनारे , किनारे।
आजा राधे आजा ,
तोहे श्याम पुकारे।
कभी रुके कभी चले ,
राधा चोरी – चोरी।
पिया कहे आ जिया ,
कहे नहीं गोरी।
शाम ढले …

राधा शरमाये .
मनवा घबराये।
पनिया भरने को जाये ,
न जाये हैया , हो – हो – हो।
खड़ी सोये ब्रजवाला ,
ब्रज में है होरी।
कान्हा रंग देंगे तोहे ,
हाय बरजोरी ।
लोग करेंगे रे इशारे।
आजा राधे आजा ,
तोहे श्याम पुकारे।
शाम ढले …

कोई कहे श्याम से ,
बाँसुरी बजाये।
चैन किसी का जो ,
चितचोर न चुराये।
डगमग डोले ,
जियां की नैय्या।
चले जब पुरवैया ,
छेड़े बंसी कन्हैया
नैनन की डोरी सोये सारा जग ,
जागे एक चकोरी।
रात कटे गिन – गिन तारे – तारे।
आजा राधे आजा ,
तोहे श्याम पुकारे।
शाम ढले …

पनघट पे सखियाँ ,
करती है बतियाँ।
मोहन से लागी ,
राधा की औखयाँ।
जो भी मिले यही पूछे ,
सुन ओ किशोरी।
शाम ढले …

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भजन :- शाम ढले जमुना किनारे
गायक :- संजय चौहान

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