श्याम तुझसे मिलने का सत्संग ही बहाना है भजन लिरिक्स

॥ दोहा ॥
सत्संगत हरी कथा , तुलसी दुर्लभ दोय ।
सुतदारा और लक्ष्मी , पापीकेभी होय ॥

श्याम तुझसे मिलने का ,
सत्संग ही बहाना है ।
दुनियाँ वाले क्या जाने ,
मेरा रिश्ता पुराना है ।।

सूरज में ढूंढा तुझे ,
चंदा में पाया है ।
तारों की झिलमिल में ,
मेरे श्याम का ठिकाना है ।।
श्याम तुझसे। …….

गंगा में ढूंढा तुझे ,
जमुना में पाया है ।
सागर की लहरों पे ,
मेरे श्याम का ठिकाना है ।।
श्याम तुझसे। …….

महलों में ढूंढा तुझे ,
झोपड़ी में पाया है ।
गलियों के कोने में ,
मेरे श्याम का ठिकाना है ।
श्याम तुझसे। …….

मथुरा में ढूंढा तुझे ,
गोकुल में पाया है ।
वृन्दावन की गलियों में ,
मेरे श्याम का ठिकाना है ।
श्याम तुझसे। …….

मंदिरों में ढूंढा तुझे ,
जंगलों में पाया है ।
भक्तों की सत्संग में ,
मेरे श्याम का ठिकाना है ।
श्याम तुझसे। …….

रामायण में ढूंढा तुझे ,
भागवत में पाया है ।
गीताजी के पन्नों में ,
मेरे श्याम का ठिकाना है ।
श्याम तुझसे। …….

तुम्ही मेरी माता हो ,
पिता मेरे तुम ही हो ।
तुम्हीं मेरे बन्धु सखा ,
मेरा श्याम ही बसेरा है ।।
श्याम तुझसे। …….

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