संत लिखमीदास जी की आरती लिरिक्स | sant likhmidas ji ki aarti lyrics

आरती गुरु लिखमों जी री कीजे ,
तन मन अन्य चरण चित्त दीजे ॥

आरती गुरु लिखमों जी री कीजे ,
आरती गुरु लिखमों जी री कीजे ।
गुरु लिखमों जी भगत अवतारी ,
प्रभु चरणों री भगती धारी ॥

आरती गुरु लिखमों जीरी कीजे ,
आरती गुरु लिखमों जीरी कीजे ।
नित प्रति कथा कीर्तन जावे ,
लिखमों जी रो प्रभु रूप बणावे ॥

आरती गुरु लिखमों जीरी कीजे ,
आरती गुरु लिखमों जीरी कीजे ।
भक्ति री खेती आप निवजाई ,
दुनियाँ दरश करण ने आई ।

आरती गुरु लिखमों जीरी कीजे ,
आरती गुरु लिखमों जीरी कीजे ।
माली कुल री कीर्ति बढ़ाई ,
भक्त रूप में पदवी पाई ॥

आरती गुरु लिखमों जीरी कीजे ,
आरती गुरु लिखमों जीरी कीजे ।
अमरपुरा रा भक्त अनुरागी ,
संत लिखमों जी है बड़भागी ॥

आरती गुरु लिखमों जीरी कीजे ,
आरती गुरु लिखमों जीरी कीजे ।
भक्तों री आरती जो कोई गावे ,
माली संत कहे संत जन तारे ।।

moinuddin manchala bhajan video

संत लिखमीदास जी की आरती, sant likhmidas ji ki aarti, राजस्थानी आरतियां, rajasthani aarti
आरती :- लिखमो जी री
गायक :- मोइनुद्दीन मनचला

Leave a Reply