हेली मारी बाहर भटके कई भजन लिरिक्स

हेली म्हारी बाहर भटके काँहि ,
थारे सब सुख है घट माँहि ॥

हेली म्हारी घट में ज्ञान विचारो ,
थारे कुण है बोलण वालो ।
हेली म्हारी उणरी करो ओळखाई ,
थारो जनम मरण मिट जाई ॥
हेली म्हारी बाहर भटके काँहि ,
थारे सब सुख है घट माँहि॥ टेर

हेली म्हारी ईड़ा पिंगळा नाड़ी ,
तां में सुकमण सेज संवारी ।
हेली ज्यूं मिले पुरूष से प्यारी ,
जां में कौण पुरूष कौण नारी ॥
हेली म्हारी बाहर भटके काँहि ,
थारे सब सुख है घट माँहि॥ टेर

हेली म्हारी गगन में घुरे निशाणा ,
ज्यांरा मरम कोई कोई जाणा ।
हेली कोई जाणे संत सुजाना ,
जिन ब्रह्म तत्व पहचाना ।
हेली म्हारी बाहर भटके काँहि ,
थारे सब सुख है घट माँहि॥ टेर

हेली म्हारी बाजे बीन सितारा ,
जठे शंख मुरली झणकारा ।
हेली म्हारी सोहम चमकत तारा ,
जठे बिना ज्योत उजियाला ॥
हेली म्हारी बाहर भटके काँहि ,
थारे सब सुख है घट माँहि॥ टेर

हेली म्हारी बाजे अनहद तूरा ,
जहां पहुंचे संत कोई शूरा ।
हेली म्हारी मिले गुरु पूरा ,
वहां नानक चरण की धूरा ॥
हेली म्हारी बाहर भटके काँहि ,
थारे सब सुख है घट माँहि॥ टेर

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भजन :- हेली म्हारी बाहर भटके काँहि
गायक :- प्रकाश माली

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