थारे भरोसे रे रामदेव भजन लिरिक्स

।। दोहा ।।
राम कृष्ण बनिया रामदेव अजमल घर अवतार।
दुखिया ने सुखिया करे ,निकलक नेजा धार।

भगता रो बेड़ो भवजल में ,
किण रे भरोसे ओ।
थारे भरोसे ओ रामदे ,
थारे भरोसे ओ।
थारे भरोसे ओ बापजी ,
थारे भरोसे ओ।

दर्शन करवा अजमल आया ,
नगर द्वारका धाम।
पुजारी मारग बतलायो ,
सागर में घनश्याम
कूद पड्या समदर में अजमल ,
किण रे भरोसे ओ।
थारे भरोसे ओ रामदे ,
थारे भरोसे ओ। टेर।

पिछम धरा में रागस भारी ,
भैरव जिणरो नाम।
मिनख मारने खावे बैरी ,
आवे ढलती शाम।
बालीनाथ जी करता तपस्या ,
किण रे भरोसे ओ।
थारे भरोसे ओ रामदे ,
थारे भरोसे ओ। टेर।

डाली बाई भगत आपरी ,
पायो थासु ज्ञान।
आप समाधि लेता आटी ,
डोरा निकल्या मांय।
डाली बाई लीवी समाधि ,
किण रे भरोसे ओ।
थारे भरोसे ओ रामदे ,
थारे भरोसे ओ।

गांव रूणिचो धाम आपरो ,
सांचो है दरबार।
आस हिय में लेकर आवे ,
दर्शन ने नर नार।
दूर दूर सु पैदल आवे ,
किण रे भरोसे ओ।
थारे भरोसे ओ रामदे ,
थारे भरोसे ओ।

मेणा दे रा लाल आपने ,
दास अशोक सुनाय।
भादरवा री बीज बापजी ,
दीजो दरश दिखाय।
डगमग डोले नाव भंवर में ,
किण रे भरोसे ओ।
थारे भरोसे ओ रामदे ,
थारे भरोसे ओ।,

moinuddin manchala ke ramdev ji ke bhajan,

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भजन :- थारे भरोसे ओ बापजी,
गायक :- मोइनुद्दीन मनचला,

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