भव सागर सु पार उतारो तीन लोक रा नाथ भजन लिरिक्स

।। दोहा ।।
शिव समान दाता नहीं, विपत्ति विदारण हार।
लज्या मोरी राखियो, शिव बेलन के असवार।

भवसागर सु पार उतारो ,
तीन लोक रा नाथ।
आसरो थारो है ,भरोसो थारो है।

नित रा सदाशिव में तो ,
थाने मनावा ,थाने मनावा।
आडावळ में धाम आपरो ,
मोटो जग में नाम ,
आसरो थारो है ,भरोसो थारो है।
भवसागर सु पार उतारो ,
तीन लोक रा नाथ। टेर।

आप त्रिलोकी वाला ,
नाथ कहावो ,नाथ कहावो।
सिंवरे सब संसार आपने ,
पूजे नर और नार ,
आसरो थारो है ,भरोसो थारो है।
भवसागर सु पार उतारो ,
तीन लोक रा नाथ। टेर।

भांग धतूरा थारे ,
भोग चढ़ावा ,भोग चढ़ावा।
दर्शन दो एक बार आपने ,
वंदन बारमबार ,
आसरो थारो है ,भरोसो थारो है।
भवसागर सु पार उतारो ,
तीन लोक रा नाथ। टेर।

दास अशोक भोला ,
अरजी सुनावे ,अरजी सुनावे।
सारो सब रा काज जगत में ,
म्हारी राखो लाज ,
आसरो थारो है ,भरोसो थारो है।
भवसागर सु पार उतारो ,
तीन लोक रा नाथ। टेर।,

mahendra goyal ke bhajan,

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भोलेनाथ जी भजन लिरिक्स,
भजन :- भवसागर सु पार उतारो,
गायक :- महेंद्र गोयल,

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