क्यों सजते हो कन्हैया तुम तेरा दीदार काफी है भजन लिरिक्स

।। दोहा ।।
भोली-भाली राधिका, भोले कृष्ण कुमार।
कुंज गलिन खेलत फिरें, ब्रज रज चरण पखार।

क्यों सजते हो कन्हैया तुम ,
तेरा दीदार काफी है।
हमें दीवाना करने को ,
नज़र का वार काफी है।
क्यों सजते हो कन्हैया तुम ,
तेरा दीदार काफी है।

क्या उबटन केशरी जलवा ,
क्यों चंदन से सजे हो तुम।
की बृज की धुल में जुसरित ,
तेरा तो श्रृंगार काफी है।
क्यों सजते हो कन्हैया तुम ,
तेरा दीदार काफी है।

क्यों माथे स्वर्ण मानक और ,
बहुमूलक मुकुट राखो।
वो घुंघराले घने केशव ,
पे मोर की पाख काफी है।
क्यों सजते हो कन्हैया तुम ,
तेरा दीदार काफी है।

क्या चंपा मोगरा जूही ,
वैजन्ती माल गल पेहरो।
श्री राधा जी की बहियन का ,
तेरे गल हार काफी है।
क्यों सजते हो कन्हैया तुम ,
तेरा दीदार काफी है।

ना छप्पन भोग की तृष्णा ,
तुम्हे हरगिज़ नहीं कान्हा।
तुम्हे तो तृप्त करने को ,
एक तुलसी सार काफी है।
क्यों सजते हो कन्हैया तुम ,
तेरा दीदार काफी है।

हो मोहक श्याम वर्णी तुम ,
हो नामा रूप घनश्यामा।
तेरी कृपा को बरसाने ,
को मन मल्हार काफी है।
क्यों सजते हो कन्हैया तुम ,
तेरा दीदार काफी है।

कभी उर में हुआ गुंजन ,
कहे कान्हा सुनले पवन।
मैं तो बस भावना देखूं ,
मुझे तो प्यार काफी है।

क्यों सजते हो कन्हैया तुम ,
तेरा दीदार काफी है।
हमें दीवाना करने को ,
नज़र का वार काफी है।
क्यों सजते हो कन्हैया तुम ,
तेरा दीदार काफी है।

कृष्ण भजन हिंदी video

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हिंदी भजन लिरिक्स इन हिंदी
भजन :- क्यों सजते हो कन्हैया तुम

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