नैया पड़ी मझधार हरि बिन कैसे लागे पार भजन लिरिक्स

नैया पड़ी मंझधार ,
हरी बिन कैसे लागे पार।
गुरु बिन कैसे लागे पार।

मैं अपराधी जनम जनम का,
मन में भरा विकार।
तुम दाता, दुःख भंजना ,
मेरी करो संभार।
गुरु बिन कैसे लागे पार।
नैया पड़ी …..

अवगुण दास कबीर के,
बहुत है गरीब नवाज।
जो मैं पूत कपूत हूँ,
कहौं पिता की लाज।
गुरु बिन कैसे लागे पार।
नैया पड़ी …..

अन्तर्यामी एक तुम्ही हो,
जीवन के आधार।
जो तुम छोड़ो हाथ प्रभु जी,
कौन उतारे पार।
गुरु बिन कैसे लागे पार।
नैया पड़ी …..

साहिब तुम मत भूलियो,
लाख लोग मिल जाये।
हम से तुम्हरे बहुत हैं,
तुम सो हमरो नाही।
गुरु बिन कैसे लागे पार
नैया पड़ी …..

नैया पड़ी मंझधार,
हरी बिन कैसे लागे पार।
गुरु बिन कैसे लागे पार।

shyam sundar thakur bhajan video

नैया पड़ी मझधार हरि बिन कैसे लागे पार भजन meri naiya padi hai majhdhaar bhajan lyrics in hindi
हिंदी भजन संग्रह लिरिक्स
भजन :- नैया पड़ी मझधार
गायक :- श्याम सुंदर ठाकुर जी

Leave a Reply