पौ सातम की रात भजन लिरिक्स

॥ दोहा ॥
संत बड़े परमारथी , शीतल वांरा अंग ।
तपत बुझावे औरों की , दे दे भगतीरंग ॥

पौ सातम की रात ,
गुरुवर आज थांने आणो है।
म्हारो भाग जगाणो है ,
पौ सातम की रात ।

मोहन खेड़ा में , धाम गुरुवर रो ,
आवे नित जातरी ।
भाव सूंपूजे , शीश चरणां में ,
गावे थांरी आरती ।
भगतां रो हर काम ,
गुरुवर पार लगाणो है ।
पौ सातम की। ……

पारख कुळ रे मांय , अवतार थे लीनो ,
केसर बाई रा लाडला ।
ऋषभदास जी तो , सम्मान पायो है ,
पिता है आपरा ।
नगर भरतपुर माँय ,
पावन जन्मरो ठिकाणो है ।।
पौ सातम की। ……

जैन शासन में , मन आपरो लागो ,
तपस्वी आप हो ।
साधनाकीनी , गुरुदेवरेशरणे ,
महर्षि आप हो ।
बाल ब्रह्मचारी ,
जीवन आपरो निराळो है ।
पौ सातम की। ……

चार खूटा में , है कीरति थारी ,
नमन है आपने ।
दीन दुखियाँ रा , दुख दूर कर दीजो ,
अरज है आपने ।
आज चरणों में ,
अशोक द्वार थारे आयो है ।
पौ सातम की। ……

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